बाल मजदूरी पर निबंध | Essay on Child Labor in Hindi

हेलो दोस्तों !आज हम आपको बाल मजदूरी पर निबंध के बारे में बताएंगे, और हमारे इस आर्टिकल के माध्यम से हम बाल मजदूरी जैसे महत्वपूर्ण विषय के बारे में जानकारियां प्राप्त करेंगे।

किसी भी क्षेत्र में बच्चों के द्वारा बचपन में किया गया कार्य अर्थात बच्चों के द्वारा किया गया सेवा बाल मजदूरी कहलाता हैं। बाल मजदूरी एक बड़ा मुद्दा बन चुका है यह हमारे भारत देश के अलावा विदेशों में भी एक बड़ा मुद्दा है जिसके बारे में हम सभी को जागरूक होना चाहिए।

हमारे इस आर्टिकल के माध्यम से आप सभी भी बाल मजदूरी के प्रति जागरूक होंगे और बच्चों से मजदूरी नहीं कराएंगे उन्हें शिक्षित होने के लिए प्रोत्साहित करेंगे, तो चलिए हमारे आज के आर्टिकल को शुरू करते हैं-

बाल मजदूरी पर निबंध
बाल मजदूरी पर निबंध

बाल मजदूरी पर निबंध

प्रस्तावना :-

बाल मजदूरी छोटे बच्चों से लिया जाने वाला कार्य होता है जो किसी भी क्षेत्र में गरीब परिवार होने के कारण या मालिकों द्वारा करवाया जाता है, बाल मजदूरी अभिभावकों या मालिकों के द्वारा दबाव पूर्ण व्यवहार से कराया जाता है।

सभी बच्चों का अधिकार है कि उन्हें बचपन में माता-पिता और अन्य लोगों का प्यार मिलना चाहिए, गरीबी और गैर कानूनी कार्य बच्चों को बड़ों की तरह जीने पर मजबूर कर देता है। गरीब परिवार में बच्चों तथा परिवार के अन्य सदस्यों को कई सारी चीजों की कमी होने के कारण उन्हें बचपन में ही बाल मजदूरी करने के लिए विवश होना पड़ता है।

बचपन हम सभी के जीवन का सबसे यादगार और खुशी का पल होता है, जो हम सभी को हमेशा याद होता है और बचपन में हमें किसी भी चीज की चिंता नहीं होती हम धूल मिट्टी में खेलकर बड़े ही आनंद से बड़े होते हैं।

बाल मजदूरी बच्चे के नियमित स्कूल जाने की क्षमता को भी बाधित करता है जो बच्चों को सामाजिक रुप से खतरनाक और नुकसानदायक नागरिक बनाता है, बाल मजदूरी को रोकने के लिए कठिन कानून बनाने चाहिए और हम सभी को बाल मजदूरी करने वाले व्यक्तियों लिए कठोर सजा का प्रावधान करना चाहिए।

बाल मजदूरी का अर्थ:-

जब बच्चों को उनके बचपन में उन्हें किसी कारणवश मजबूरी से काम करने के लिए विवश किया जाता है तो उसे बाल श्रम या बाल मजदूरी कहा जाता है। बच्चों को गरीबी के कारण उनके परिवार से दूर रखकर उन्हें गुलामों की तरह कार्य कराया जाता है, और इन सभी कार्यों को कराने के लिए उनके माता-पिता और मालिक जिम्मेदार होते हैं।

किसी बच्चे को बचपन के दौरान पैसे या अन्य किसी लालच के बदले में करवाया गया कार्य बाल मजदूरी कहलाता है, बच्चों को बाल्यकाल के दौरान कई व्यक्तियों के द्वारा उन्हें लालच देकर कार्य करवाया जाता है जिससे बाल मजदूरी कहा जाता है।

बाल मजदूरी के श्रेणी में 14 वर्ष से कम आयु के बच्चे आते हैं, उनसे मजदूरी कराना गैरकानूनी होता है, क्योंकि इससे बच्चों को खेलकूद, शिक्षा आदि का अवसर प्राप्त नहीं होता और बच्चे बाल मजदूरी करने के कारण शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से प्रताड़ित होते हैं।

बाल मजदूरी के कारण :-

बाल मजदूरी का सबसे बड़ा कारण गरीबी होता है, गरीब परिवार के लोग अपने आजीविका को चलाने के लिए अपने बच्चों को बाल मजदूरी करने के लिए भेज देते हैं,, और बच्चों को बाल मजदूरी करके जो पैसे मिलते हैं उससे परिवार की आजीविका चलाई जाती है।

शिक्षा के अभाव के कारण भी अभिभावक सोचते हैं कि बच्चा जितना जल्दी कमाना सीख जाएगा उतना ही अच्छा होगा बच्चे के लिए , तथा कुछ बच्चों के माता-पिता लालची होते हैं जो खुद तो कार्य नहीं करना चाहते और अपने बच्चों को कुछ पैसों के लिए बाल मजदूरी करने के लिए भेज देते हैं।

बच्चों को कम पैसे देकर कार्य कराया जाता है जिसके कारण कई लोग बच्चों को काम पर रखते हैं और उन्हें बदले में कम पैसे देते हैं, सभी लोग बच्चों को काम पर रखना अधिक पसंद करते हैं क्योंकि इससे उन्हें कम पैसा देना पड़ता है तथा वे अपना दबाव बनाकर किसी भी कार्य को करने के लिए बच्चे पर जोर जबरदस्ती करते हैं।

हमारे देश में कई बच्चे ऐसे होते हैं जिनके माता-पिता नहीं होते हैं, और उन अनाथ बच्चों को लोग डरा धमका कर भीख मांगने और मजदूरी करने के लिए भेज देते हैं। बच्चे अपने परिवार की मजबूरियों के कारण ही अपने पढ़ाई को छोड़कर बाल मजदूरी करने जाते हैं।

हमारे भारत देश में जनसंख्या में लगातार वृद्धि हो रही है जिसके कारण वस्तुओं का मूल्य भी दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है और यह गरीब लोगों के लिए समस्या बनता जा रहा है क्योंकि मूल्य बढ़ने से गरीब परिवार के लोग अपने परिवार का भरण पोषण नहीं कर पाते हैं जिसके कारण अपने बच्चों को बाल मजदूरी करने के लिए भेज देते हैं।

बाल मजदूरी के दुष्परिणाम :-

हम सभी के जीवन का सबसे अच्छा पल बचपन होता है, जब हम बचपन अर्थात बच्चे होते हैं तो हमें किसी भी बात की कोई चिंता नहीं होती, हम अपने बचपन में खिलौनों से खेलते हैं और सभी लोग हमें बचपन में प्यार करते हैं।

बचपन में हम जो चाहे पढ़ सकते हैं लेकिन जिन बच्चों को बाल मजदूरी करने के लिए भेज दिया जाता है वे सभी बच्चे शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाते तथा मनपसंद की खेल भी नहीं खेल पाते हैं उनका पूरा बचपन बाल मजदूरी करने में ही बीत जाता है।

बाल मजदूरी के दौरान कई बच्चे और बच्चियों का शारीरिक शोषण भी किया जाता है, बचपन में सभी बच्चे मजदूरी करते समय बहुत सारी गलतियां करते हैं जिसके कारण उन्हें मालिकों के द्वारा बहुत डांटा जाता है और उन्हें डरा धमका कर काम कराया जाता है जो बच्चों के लिए मानसिक प्रताड़ना होता है यह बच्चों पर बहुत बुरा प्रभाव डालता है।

बच्चों को बाल मजदूरी कराया जाता है जिसके कारण बच्चे शिक्षा से वंचित हो जाते हैं और उन्हें पूरे जीवन भर मजदूरी करके ही भरण पोषण करना पड़ता है उन्हें शिक्षा प्राप्त ना होने के कारण जॉब भी नहीं मिल पाता है।

लोगों को जहां बाल मजदूरी कराया जाता है वहां के लोग कई प्रकार के गलत शब्दों का प्रयोग करते हैं तथा उसके साथ-साथ उनके रहन-सहन का भी अच्छा इंतजाम नहीं करते है और यह बच्चों पर बुरा प्रभाव डालता है, इन सभी के कारण बच्चों की मानसिक स्थिति भी कमजोर हो जाती है जिसके कारण वे एक अच्छे समाज का विकास नहीं कर पाते हैं।

बच्चों का शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक तथा सामाजिक रूप से विकास रुक जाता है, तथा वे कमजोर हो जाते हैं और उन्हें कई प्रकार के बीमारियों का शिकार होना पड़ता है। बाल मजदूरी करने के कारण उन्हें बचपन में अच्छे भोजन की भी प्राप्ति नहीं होती है जिसके कारण बच्चे कुपोषण के शिकार हो जाते हैं।

बाल मजदूरी के रोकथाम के उपाय :-

बाल मजदूरी हम सभी के समाज के लिए एक बहुत बड़ा अभिशाप है, हमारे समाज के बच्चों को बुरी तरह से प्रभावित करता है, जिसे रोकने के लिए हम सभी को प्रयास करना चाहिए।

बाल मजदूरी को खत्म करने के लिए हम सभी को अपनी सोच बदलने चाहिए और इसका अंत करने के लिए हमें अपने घर या दफ्तरों में किसी भी छोटे बच्चे को काम पर नहीं रखना चाहिए।

बाल मजदूरी को रोकने के लिए मजबूत और कड़े कानून बनाने चाहिए जिससे सभी व्यक्ति किसी भी बच्चे को बाल मजदूरी करवाने से डरे।

बाल मजदूरी के बारे में सभी व्यक्तियों को जागरूक होना चाहिए और समाज में व्यक्तियों के द्वारा बाल मजदूरी कराए जाने पर उन्हें कठोर सजा का प्रावधान करना चाहिए।

सभी ग्रामीण इलाकों के अभिभावकों को बाल मजदूरी के प्रति जागरूक करना चाहिए क्योंकि ग्रामीण इलाके के अधिकतर अभिभावक शिक्षित नहीं होते हैं जिससे उन्हें इन सभी के बारे में ज्ञान नहीं होता है।

उपसंहार:-

बाल मजदूरी हमारे देश के लिए एक गंभीर समस्या है, इसे खत्म करना बहुत ही आवश्यक है यह हमारे देश के विकास में बाधक है। बाल मजदूरी के कारण बच्चे शिक्षा से वंचित हो जाते हैं और गलत राह पर जाने लगते हैं, बच्चे हमारे देश के विकास के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण होते हैं।

बाल मजदूरी जैसे समस्या को समाप्त करने के लिए सभी लोगों को जितना हो सके उतना प्रयास करना चाहिए तथा इस समस्या को समाप्त करने के लिए कठोर से कठोर कदम उठाने चाहिए, बाल मजदूरी को जड़ से खत्म करना होगा तभी हमारे देश का विकास हो सकेगा।

निष्कर्ष –

उम्मीद है दोस्तों आप सभी को यह आर्टिकल पसंद आएगा, इसे पढ़कर आप सभी बाल मजदूरी के बारे में जान सकेंगे तथा लोगों के द्वारा बच्चों को बाल मजदूरी कराए जाने पर आप बच्चों को बाल मजदूरी करने से रोकेंगे।

सम्बंधित लेख :-

Leave a Comment