भारतीय संविधान पर निबंध | Essay on Indian Constitution in Hindi

नमस्कार दोस्तों आप सभी का स्वागत है हमारे वेबसाइट में आज हम आपके लिए भारतीय संविधान पर निबंध लेकर आए हैं जो आप सभी के निबंध लेखन तथा प्रोजेक्ट वर्क में सहायक होगा।

भारतीय संविधान पर अक्सर सभी स्कूल कॉलेज में निबंध लिखने को दिया जाता है तथा निबंध प्रतियोगिता भी कराई जाती है और यह एक महत्वपूर्ण विषय है जिसके बारे में प्रतियोगी परीक्षाओं में भी पूछा जाता है। यदि आप हमारे इस निबंध को पढ़ते हैं तो आप आसानी से प्रतियोगी परीक्षाओं में भी इसके बारे में लिख सकते हैं।

भारतीय संविधान पर निबंध 1

प्रस्तावना

सभी देश का अपना एक संविधान होता है जो देश के नियम और कानून को निश्चित रूप से निर्धारित करता है और संविधान प्रत्येक देश के कानून का दर्शन कराता है जो यह निश्चित करता है कि देश का राजनीतिक लोकतांत्रिक है या तानाशाही तथा संविधान से इस बात का भी ज्ञान होता है कि देश की राजनीति समाजवादी है या पूंजीवादी, और हर देश के भांति हमारे भारत देश का भी एक संविधान है।

भारत देश का संविधान हमारे देश के सरकार और प्रशासन को वैधानिक रूप से कार्य करने का प्रेरणा देता है और संविधान किसी भी देश की जरूरत होती है यह लोकतंत्र का आधार स्तंभ होता है और संविधान ही होता है जो लोकतंत्र के रक्षक न्यायपालिका को सशक्त बनाता है।

संविधान सरकार का एक रूप होता है और संविधान सर्वोच्च सरकार की संरचना को ठीक करता है तथा प्रत्येक देश का एक संविधान होना बहुत आवश्यक है जो दुनिया के एक आदर्श संविधान राष्ट्र को धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक बनाता है।

भारत देश का संविधान दुनिया का सबसे लंबा संविधान है सरकार के राजनीतिक सिद्धांतों और प्रतिक्रिया में शक्तियों का वर्णन करता है। भारत देश का संविधान 26 नवंबर सन 1949 को लिखा गया था और 26 जनवरी सन 1950 को लागू हुआ था। भारतीय संविधान एक संविधान सभा द्वारा तैयार किया गया था जिसे 1946 में स्थापित किया गया था और डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद इस संविधान सभा के अध्यक्ष चुने गए थे।

भारतीय संविधान की विशेषताएं

भारतीय संविधान दुनिया का सबसे बड़ा संविधान है और यह संविधान कठोर तथा लचीला है तथा एकात्मक विशेषताओं के साथ संघीय प्रणाली है। भारतीय संविधान धर्मनिरपेक्ष है । भारतीय संविधान में सभी लोगों को समानता का अधिकार प्राप्त है और भारतीय संविधान सभी लोगों को एक समान रोजगार का अवसर सुनिश्चित करता है।

भारतीय संविधान नागरिकों को स्वतंत्रता का अवसर प्राप्त कराता है और यदि आपातकाल की स्थिति या कुछ विशेष परिस्थितियों में राज्य को इन अधिकारों पर उचित प्रतिबंध लगाने का भी अधिकार है स्वतंत्रता के अधिकार के अंतर्गत सभी लोगों को बोलने की स्वतंत्रता तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और इनके अलावा विभिन्न प्रकार की स्वतंत्रता दी गई हैं।

यह भारतीय राजनीति के धर्मनिरपेक्ष प्रकृति को इंगित करता है और सभी धर्म के लोगों को एक समान अधिकार देता है तथा प्रत्येक धर्म को अपना विचार रखने का अधिकार भी दिया गया है प्रत्येक व्यक्ति को धार्मिक और धर्मार्थ संस्थानों को स्थापित करने और उनका निर्माण करने का अधिकार दिया गया है।

भारतीय संविधान में संवैधानिक उपचार का अधिकार

यदि देश में नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया जाता है तो संविधान न्यायालय नागरिकों को उपचार का पूर्ण गारंटी देता है और सरकार किसी के अधिकारों का उल्लंघन या उस पर अंकुश नहीं लगा सकता और यदि इन अधिकारों का उल्लंघन होता है तो पीड़ित पक्ष अदालत में अपना शिकायत दर्ज कर सकता है।

संविधान के द्वारा भारत के प्रत्येक नागरिक को सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार दिया जाता है और भारतीय संविधान के प्रणेता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी ने संवैधानिक उपचार के अधिकार भारतीय संविधान को आत्मा कहा था।

भारतीय संविधान के मौलिक कर्तव्य

भारतीय संविधान का मौलिक कर्तव्य देश के विकास के कार्य करना, आदर्शों और संस्थानों तथा राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करना है, स्वतंत्रता के लिए राष्ट्रीय संघर्ष को प्रेरित करने वाले महान आदर्शों का पालन करना है तथा महिलाओं की गरिमा के लिए अपमानजनक प्रथाओं का त्याग करना।

इनके अलावा देश के मिश्रित संस्कृति को समृद्ध और संरक्षित करना, प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा करना और वन्यजीवों तथा जंगलों का सुधार करना और जीवित प्राणियों के प्रति दया करना आदि है।

संविधान का अर्थ

संविधान एक ऐसे दस्तावेजों का पुंज होता है जिससे हमें यह ज्ञात होता है कि राज्य का गठन किस प्रकार होता है और किन सिद्धांतों का पालन करता है। भारत का संविधान एक लिखित संविधान है जिसे सामूहिक रूप से संविधान कहा जाता है। संविधान सरकार को सकारात्मक सामर्थ्य प्रदान करने और लोक कल्याणकारी कदम उठाने तथा राष्ट्र के बुनियादी पहचान के लिए अत्यंत आवश्यक होता है।

संविधान की आवश्यकता और उनके कार्य

संविधान एक बुनियादी नियम होता है जो एक ऐसा समूह उपलब्ध कराता है जो समाज के सदस्यों में न्यूनतम समन्वय और विश्वास बनाए रखता है। किसी भी समूह को सार्वजनिक रूप से मान्यता प्राप्त कुछ नियमों की आवश्यकता होती है जिसे समूह के सदस्य जानते हो ताकि समूह में आपस में न्यूनतम समन्वय बना रहे।

संविधान के नियमों को पता होने के साथ-साथ उन्हें लागू किया जाना भी बहुत आवश्यक होता है इसलिए जब इनके नियमों को न्यायालय द्वारा लागू किया जाता है तो इससे सभी को विश्वास हो जाता है कि लोग भी इन नियमों का पालन करेंगे और ऐसा नहीं करने पर उन्हें दंड दिया जाता है। संविधान के द्वारा ऐसे नियमों को केवल बनाया ही नहीं जाता है बल्कि उन्हें न्यायालय द्वारा लागू भी करवाया जाता है।

निर्णय लेने के शक्ति का निर्धारण

संविधान में इस कार्य को भी स्पष्ट किया जाता है कि समाज में निर्णय लेने की शक्ति किसके पास होनी चाहिए, शक्ति किसके पास होने चाहिए तथा संविधान यह भी तय करता है कि सरकार कैसे निर्मित होगी और संविधान कुछ ऐसे बुनियादी सिद्धांतों का समूह होता है जिसके आधार पर राज्य का निर्माण और शासन का निर्माण होता है।

सरकार के शक्तियों की सीमाएं

सरकार के द्वारा नागरिकों पर लागू किए जाने वाले कानून के सीमा का निर्धारण भी संविधान के द्वारा किया जाता है। कानून की सीमा मौलिक रूप में होती है जिसका सरकार कभी भी उल्लंघन नहीं कर सकता है और संविधान सरकार के शक्तियों को विभिन्न प्रकार से सीमित कर सकता है।

संविधान नागरिकों के मूल अधिकार को स्पष्ट कर देता है जिससे कोई भी सरकार उनका उल्लंघन नहीं कर सकता और नागरिकों को मनमाने ढंग से बिना किसी कारण गिरफ्तार करने के विरुद्ध अधिकार प्रदान करता है। संविधान के द्वारा नागरिकों को कुछ मौलिक स्वतंत्रता दी जाती है जिसके तहत नागरिक को भाषण की स्वतंत्रता, संगठन बनाने की स्वतंत्रता आदि मिली है।

समाज के आकांक्षाएं और लक्ष्य

संविधान के द्वारा ऐसे क्षमताओं को प्रदान किया जाता है जिससे जनता के आकांक्षाओं को पूरा किया जा सके और एक अच्छे समाज के स्थापना के लिए उचित परिस्थितियों का निर्माण किया जा सके ।

आधुनिक संविधान निर्णय लेने की शक्ति के वितरण और संस्कार के शक्ति प्रतिबंध लगाने का कार्य करता है साथ ही एक ऐसा सक्षम ढांचा भी प्रदान करता है जो समाज के आकांक्षा और लक्ष्य को अभिव्यक्ति प्रदान करता है।

उपसंहार

संविधान किसी भी देश के प्रशासन को मार्गदर्शन करने के नियम और विनिमय का एक समूह होता है और हमारे भारत देश का संविधान दुनिया का सबसे लंबा संविधान है और 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू किया गया था। भारत देश का संविधान एक संविधान सभा के द्वारा तैयार किया गया था जिसे 1946 में स्थापित किया गया था।

प्रत्येक देश के लिए संविधान की आवश्यकता होती है संविधान भारत देश को दुनिया के सबसे मजबूत देशों में से एक बनाता है और इस प्रकार से एक मजबूत संविधान के बिना भारत के सत्तावादी शासन को नहीं चलाया जा सकता है।

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प्रस्तावना

भारत देश का संविधान बहुत मजबूत है जिसके कारण भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा लोकतंत्र देश बना है भारत के संविधान की प्रस्तावना ने देश को एक समाजवादी धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य में एक शक्ति के रूप में घोषित किया जिससे राज्य का कल्याण, धर्म ,जाति ,पंथ के आधार पर बिना किसी भेदभाव के लोगों को स्वतंत्रता और समानता का अधिकार प्राप्त कराता है।

भारतीय संविधान

भारतीय संविधान को औपचारिक रूप से बनाया गया है जिसे अविभाजित भारत ने कैबिनेट मिशन के योजना के अनुसार भारत देश में निर्वाचित किया और इसका पहला बैठक 9 दिसंबर 1946 को किया गया तथा तत्पश्चात 14 अगस्त 1947 को भारत के संविधान सभा के रूप में इसका बैठक किया गया।

विभाजन के बाद संविधान सभा के सदस्यों की संख्या 299 थे और इसमें 26 नवंबर 1947 को कुल 284 सदस्य उपस्थित थे इन्होंने ही संविधान को अंतिम रूप में इस पर हस्ताक्षर करके पारित किया इस प्रकार से भारतीय संविधान सभा को 9 सितंबर 1946 में निर्माण कार्य का प्रारंभ किया गया जिसे 26 नवंबर 1949 को पूरा किया गया।

भारतीय संविधान सभा का स्वरूप

भारत के संविधान सभा के सदस्यों का चुनाव कैबिनेट मिशन योजना के तहत 1935 में स्थापित प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों के द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से किया गया जिसमें 292 सदस्य ब्रिटिश प्रांत से और 93 सीटें देसी रियासतों से आवंटित होनी थी और सभी प्रांत के सीटों को तीन प्रमुख समुदायों मुस्लिम, सिख और साम्राज्य सीटों के जनसंख्या के अनुपात में बांटा गया था।

इस प्रकार से हमारे संविधान सभा के सदस्य सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर नहीं चुने गए थे पर उसे अधिकाधिक प्रतिनिधित्व पूर्ण बनाने का प्रयास किया गया और सभी धर्म के सदस्यों को तथा अनुसूचित वर्ग के सदस्यों को इस में स्थान दिया गया तत्पश्चात संविधान सभा में 82% सीटें कांग्रेस दल के संबंध में थी परंतु कांग्रेस दल स्वयं विविधताओं से भरा हुआ था।

भारतीय संविधान के प्रस्ताव के मुख्य उद्देश्य

भारत देश एक स्वतंत्र और संप्रभु गणराज्य है और संप्रभु तथा स्वतंत्र भारत के संविधान के समस्त शक्तियों और सत्ता का स्रोत है। भारत देश के सभी लोगों को सामाजिक और आर्थिक तथा राजनीतिक न्याय के कानून समक्ष रूप से समानता, प्रतिष्ठा तथा अवसर की समानता , और कानून सार्वजनिक रूप से प्रदान करने के उद्देश्य से इसका प्रस्ताव रखा गया था।

संविधान के कार्य और शक्तियां

देश के नागरिकों का क्या अधिकार होगा और उनका क्या कर्तव्य होगा तथा किसको कितना कर देना होगा और पुलिस व्यवस्था कैसे होगी न्यायालय कैसा होगा आदि सभी बातों का निर्धारण देश के संविधान के द्वारा किया जाता है जो किसी राष्ट्र के प्रतिरूप को सही ढंग से चलाने के लिए बहुत आवश्यक होता है।

लोकतंत्र में शक्ति जनता में निहित होता है इसलिए जनता आदर्श रूप में इस शक्ति का प्रयोग स्वयं कर सकता है परंतु वर्तमान में राष्ट्र का आकार बड़ा है जहां प्रत्यक्ष लोकतंत्र का होना संभव नहीं है। वर्तमान में प्रतिनिधायन लोकतंत्र का युग है जहां के जनता वयस्क मताधिकार के द्वारा अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं।

उपसंहार

भारतीय संविधान भारत के नागरिकों को मौलिक अधिकारों के एक विस्तृत सूची प्रदान करता है और संविधान नागरिकों को 11 कर्तव्यों की एक सूची भी प्रदान करता है जिसे मौलिक कर्तव्यों के रूप में जाना जाता है। भारत देश एक गणतंत्र है जिसका अर्थ होता है सम्राट देश पर शासन नहीं करता है अर्थात सरकार जनता की और जनता के द्वारा अन्य जनता के लिए होती है।

संविधान हमें विभिन्न प्रकार के नियम तथा कानून उपलब्ध कराता है जो हमारे समक्ष न्यूनतम समन्वय और विश्वास स्थापित करता है तथा हमें सार्वजनिक रूप से मान्यता प्राप्त कुछ बुनियादी नियमों के आवश्यकताओं को भी प्राप्त कराता है क्योंकि सार्वजनिक रूप से हमें मान्यता प्राप्त बुनियादी नियमों का बहुत आवश्यकता होता है।

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निष्कर्ष

उम्मीद है आप सभी को यह भारतीय संविधान पर निबंध पसंद आएगी तथा आप सभी के लिए मददगार और ज्ञानवर्धक भी साबित होगी।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भारत के संविधान को कब अपनाया गया था?

भारतीय संविधान को 26 नवंबर 1949 को अपनाया गया था तथा इसे पूर्ण रूप से 26 नवंबर 1950 को देश में लागू किया गया था।

किस संविधान को अंग्रेजी और हिंदी में हस्तलिखित किया गया था?

भारतीय संविधान एकमात्र ऐसा संविधान है जिसे 2 भाषाओं अर्थात अंग्रेजी और हिंदी भाषा में हस्तलिखित किया गया था।

भारत देश के संविधान को तैयार करने में कितना समय लगा था?

भारतीय संविधान को तैयार करने में लगभग 2 साल 11 महीने और 18 दिन का समय लगा था।

भारतीय संविधान दिवस प्रत्येक वर्ष कब मनाया जाता है?

भारतीय संविधान दिवस प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी को मनाया जाता है और भारत का संविधान अधिकारिक रूप से अपनाया गया था जो 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ था जिसे भारत के गणतंत्र दिवस के रूप में भी जाना जाता है।

भारतीय संविधान के पिता के रूप में किसे जाना जाता है?

भारतीय संविधान के पिता के रूप में डॉक्टर बी आर अंबेडकर जी को जाना जाता है और भारतीय संविधान दुनिया के सबसे लंबे संविधान में से एक है।

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