स्वर्ण मंदिर के बारे में जानकारी | Information About Golden Temple in Hindi

नमस्कार दोस्तों! आप सभी का स्वागत है हमारे आज के लेख में, इस आर्टिकल में स्वर्ण मंदिर के बारे में जानकारी दी गई है जिसकी मदद से आप सभी स्वर्ण मंदिर (गोल्डन टेंपल) के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

स्वर्ण मंदिर के बारे में जानकारी

गोल्डन टेंपल (स्वर्ण मंदिर)

स्वर्ण मंदिर सिख धर्म का सबसे पावन और प्रमुख धर्म स्थल है, तथा इस स्वर्ण मंदिर को हरी मंदिर साहिब और दरबार साहिब के नाम से भी जाना जाता है इसके अलावा कुछ लोगों के द्वारा इसे सत तीरथ के नाम से भी जाना जाता है।

यह मंदिर सिखों के 5 तीर्थ स्थलों में से सबसे महत्वपूर्ण है, इसी स्थान पर सिखों के पवित्र धर्म ग्रंथों को स्थापित किया गया था, जो एक गुरुद्वारा है लेकिन इसे स्वर्ण मंदिर के नाम से जाना जाता है क्योंकि इस गुरुद्वारे का ऊपरी हिस्सा सोने से बना हुआ है।

स्वर्ण मंदिर पंजाब के अमृतसर शहर में स्थित है, पंजाब वर्तमान समय में गोल्डन टेंपल के नाम से हमारे भारत देश में ही सिर्फ नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व में प्रसिद्ध है, जहां प्रतिदिन हजारों लोग आते हैं , गुरुद्वारे में आए हुए लोगों को सांगत के नाम से पुकारा जाता है।

स्वर्ण मंदिर में लोग भारत से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी आते हैं, यहां रोजाना हजारों लोग भारी मात्रा में दर्शन करने के लिए आते हैं।

स्वर्ण मंदिर का इतिहास

स्वर्ण मंदिर का निर्माण कार्य 1588 में शुरू किया गया था, और सन 1588 में इस मंदिर की नींव सिखों के चौथे गुरु रामदास जी के द्वारा रखवाया गया था। स्वर्ण मंदिर सिखों के पवित्र धर्म ग्रंथ का निर्माण दरबार साहिब के निर्माण करते समय किया गया है।

दरबार साहिब के निर्माण के बाद दरबार साहिब को नष्ट करने का कोशिश भी कई बार किया गया था और इसमें कुछ लोग सफल भी हुए थे लेकिन गुरुद्वारे को नष्ट करने के हजारों कोशिशों के बाद भी नष्ट नहीं हुआ क्योंकि इसे जितनी बार नष्ट करने का कोशिश किया जाता था उतने बार इसे फिर से बनवा दिया जाता था।

स्वर्ण मंदिर के चारों दिशाओं में गेट बने हुए हैं जिससे ज्ञात होता है की यहां गुरुद्वारे में किसी भी धर्म या जाति के लोग आ जा सकते हैं सभी धर्मों के लोगों को आने जाने की अनुमति है यहां किसी भी प्रकार की भेदभाव नहीं है।

प्राचीन समय में कुछ विवाद और समस्याओं के कारण कई मंदिरों में दूसरे धर्म या संप्रदाय के लोगों को जाने की अनुमति नहीं रहती थी, लेकिन गुरुद्वारे में प्राचीन समय से ही सभी धर्म के लोग जा सकते हैं जहां किसी भी प्रकार की रोक नहीं लगाई जाती थी और ना ही वर्तमान में लगाई जाती है।

स्वर्ण मंदिर का इतिहास गुरुद्वारे के दीवारों पर भी देखा जा सकता है, गुरुद्वारे की दीवारों पर गुरुमुखी में इतिहास लिखा हुआ है।

स्वर्ण मंदिर का सरोवर

हरिमंदिर साहिब में बने सरोवर को श्री गुरु रामदास जी ने बनवाया था और स्वर्ण मंदिर सरोवर के बीचों बीच में बना हुआ है इस मंदिर तक पहुंचने के लिए एक रास्ता भी बनाया गया है ताकि सभी लोग इस मंदिर में जाकर दर्शन कर सकें।

स्वर्ण मंदिर के सरोवर का जल अमृत के समान पवित्र माना जाता है, तथा इस शहर का नाम भी इस सरोवर के नाम पर रखा गया है। सिख धर्म के लोगों की मान्यता है इस सरोवर में स्नान करने से सभी लोगों के सारे दुख और दर्द दूर हो जाते हैं इसलिए यहां दूर-दूर से लोग स्नान करने के लिए भी आते हैं।

स्वर्ण मंदिर में जाने के नियम

स्वर्ण मंदिर में सभी वर्ग और धर्म के लोग आते जाते हैं परंतु इस मंदिर में जाने के लिए कुछ नियम बनाए गए हैं जिसे सभी लोगों को ध्यान में रखना बहुत ही आवश्यक है। स्वर्ण मंदिर में जाने के नियम निम्न है-

सूर्य मंदिर में जाने से पहले आप सभी को अपना सिर ढंकना होगा जिसके लिए लड़के अपने रुमाल से और लड़कियां अपने दुपट्टे से अपना सर ढंक कर अन्दर जा सकते हैं। स्वर्ण मंदिर में किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थ जैसे मदिरा, मास, सिगरेट या ड्रग्स आदि का सेवन करके आप स्वर्ण मंदिर में नहीं जा सकते हैं यहां ऐसे किसी भी प्रकार के पदार्थ को लाना वर्जित है।

स्वर्ण मंदिर में किसी भी प्रकार की तस्वीरें लेने की अनुमति नहीं है, तस्वीरें लेने के लिए आपको अनुमति लेनी पड़ेगी तभी आप स्वर्ण मंदिर में तस्वीरें ले सकते हैं।

स्वर्ण मंदिर में प्रवेश करने के बाद शांति बनाए रखने की सलाह दी जाती हैं यहां शोर करना या किसी से भी ऊंची आवाज में बात करना मना है।

स्वर्ण मंदिर का लंगर

सिख धर्म में गुरुद्वारे में भोजन कराया जाता है जिसे लंगर के नाम से जाना जाता है, लंगर की प्रथा 25 वीं सदी में सिखों के प्रथम गुरु, गुरु नानक देव जी ने शुरू किया था, इस प्रथा को गुरु नानक देव जी ने ऊंच नीच और जात पात को हटाने के लिए चलाया था।

लंगर में सभी लोगों को एक साथ बैठा कर भोजन कराया जाता है क्योंकि सभी धर्म जाति के लोग एक समान होते हैं जिन्हें लंगर में एक साथ बैठा कर भोजन परोसा जाता है, लंगर हरमिंदर साहिब में दिया जाता है जहां आप सभी किसी भी समय जाकर लंगर अर्थात भोजन कर सकते हैं।

स्वर्ण मंदिर के आस पास घूमने की लोकप्रिय जगहें

स्वर्ण मंदिर अमृत शहर के बीचो बीच बसा हुआ है जिसके कारण स्वर्ण मंदिर के आसपास चारों तरफ अच्छा खासा मार्केट भी देखने को मिलता है जहां से आप सभी मार्केट में घूम कर शॉपिंग कर सकते हैं।

श्री हरिमंदिर साहिब के नजदीक में है आपको कई गुरुद्वारे देखने को मिल जाएंगे जहां जाकर आप सभी घूम सकते हैं तथा बाबा अटल और गुरुद्वारा माता साहिब स्वर्ण मंदिर के पास में ही स्थित है जहां सभी पर्यटक पैदल घूम फिर सकते हैं।

स्वर्ण मंदिर के आसपास ही कई ऐतिहासिक जलियांवाला बाग भी हैं, जहां जनरल डायर के आदेश पर कई लोगों को गोली मारी गई थी। स्वर्ण मंदिर के आसपास देखने के लिए कई जगह हैं जैसे गुरुद्वारा शहीद बंगा, बेर बाबा बुड्ढा जी, बाबा दीप सिंह आदि।

स्वर्ण मंदिर जाने के लिए सबसे अच्छा समय

स्वर्ण मंदिर में वैसे तो लोग कभी भी जा सकते हैं लेकिन स्वर्ण मंदिर में जाने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के महीने को माना जाता है, इन दिनों आपको घूमने में बहुत आनंद प्राप्त होता है क्योंकि इन महीनों में तापमान अच्छा होता है जिससे सभी लोग आराम से इस मंदिर में घूम कर आनंद ले सकते हैं।

गर्मी के दिनों में यहां बहुत तेज गर्मी पड़ती है जिससे तापमान 40 से 45 डिग्री तक देखने को प्रतीत होता है, जिससे आप सभी को गर्मी के दिनों में घूमने में काफी परेशानियां हो सकती हैं इस कारण स्वर्ण मंदिर में घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च को माना जाता है।

स्वर्ण मंदिर का लंगर

स्वर्ण मंदिर में प्रतिवर्ष लंगर होता है, जिसमें हजारों लोगों को प्रतिदिन लंगर खिलाया जाता है, इस लंगर में सभी धर्म जाति के लोग शामिल हो सकते हैं यहां किसी भी प्रकार के धर्म जाति के लोगों के साथ भेदभाव नहीं किया जाता है अर्थात सभी लोगों को एक साथ बैठा कर भोजन कराया जाता है।

स्वर्ण मंदिर के लंगर में एक कमरे में 5000 लोग भी आराम से बैठकर लंगर खा सकते हैं, यह लंगर पूरे विश्व में प्रसिद्ध है जहां हमारे भारत देश के अलावा विदेशों से भी लंगर का आनंद लेने के लिए लोग अत्यधिक मात्रा में आते हैं।

स्वर्ण मंदिर में दर्शन करने का सही समय

स्वर्ण मंदिर के दर्शन के लिए सुबह 3:00 बजे से ही मंदिरों को खोल दिया जाता है, और रात को 10:00 बजे तक इस मंदिर का दर्शन किया जा सकता है। स्वर्ण मंदिर का दर्शन आप पहले करना चाहते हैं तो आपको सुबह-सुबह ही स्वर्ण मंदिर में जाना होगा क्योंकि यहां लाखों लोगों की भीड़ होती है जिससे लाइन में लगना पड़ता है।

अत्यधिक भीड़ होने के कारण स्वर्ण मंदिर का दर्शन करने के लिए कई घंटों तक लाइन लगने भी पड़ सकते हैं इसलिए आप सभी को स्वर्ण मंदिर के दर्शन करने हैं तो सुबह-सुबह ही चले जाएं।

निष्कर्ष –

उम्मीद है दोस्तों आप सभी को गोल्डन टेंपल अर्थात स्वर्ण मंदिर के बारे में जानकारी दी गई पसंद आएगी और यह जानकारी आप सभी के लिए मददगार भी साबित होगी।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

स्वर्ण मंदिर किस धर्म का प्रमुख धर्म स्थल है ?

स्वर्ण मंदिर सिख धर्म का सबसे पावन और प्रमुख धर्म स्थल है इस मंदिर को हरी मंदिर साहिब और दरबार साहिब के नाम से भी जाना जाता है।

स्वर्ण मंदिर कहां स्थित है ?

स्वर्ण मंदिर पंजाब के अमृतसर शहर में स्थित है और यहां के गुरुद्वारे में आए हुए लोगों को सांगत के नाम से पुकारा जाता है।

स्वर्ण मंदिर का निर्माण कब हुआ था ?

स्वर्ण मंदिर का निर्माण कार्य 1588 में शुरू किया गया था और सन 1588 में इस मंदिर की नींव को सिक्खों के चौथे गुरू रामदास जी के द्वारा रखवाया गया था।

हरी मंदिर साहिब मैं सरोवर को किसने बनवाया था ?

हरिमंदिर साहिब में बने हुए सरोवर को श्री गुरु राम दास जी ने बनवाया था और यह सरोवर स्वर्ण मंदिर के बीचो बीच में बना हुआ है।

सिख धर्म में गुरुद्वारे में कराए जाने वाले भोजन को किस नाम से जाना जाता है ?

सिख धर्म में गुरुद्वारे में जो भोजन कराया जाता है उसे लंगर के नाम से जाना जाता है और यह प्रथा 25 वीं सदी में सिखों के प्रथम गुरु ,गुरु नानक देव जी के द्वारा शुरू किया गया था।

Leave a Comment